जंगल में नदी के किनारे शेर और बैल आमने-सामने खड़े हैं, और पीछे झाड़ियों से दो सियार उन्हें चुपके से देख रहे हैं।

शेर और बैल

Intermediate · ≈ 5 min story · 3 min read

जंगल का राजा शेर और एक समझदार बैल गहरे दोस्त बन जाते हैं। लेकिन दो चालाक सियार इस दोस्ती से जलते हैं और दोनों के कानों में झूठी बातें भरकर शक का बीज बो देते हैं। बिना बात किए ही दोस्त एक-दूसरे से भिड़ जाते हैं, और बाद में शेर को पछताना पड़ता है। यह कहानी सिखाती है कि दूसरों की बातों में आने से पहले अपने दोस्त से सीधे बात करनी चाहिए।

एक बार, नदी में पानी पीते हुए एक बैल की अजीब-सी आवाज़ पूरे जंगल में गूँजने लगी। उसी समय जंगल का राजा शेर अपनी गुफा की ओर लौट रहा था, उसने वह अनोखी आवाज़ सुनी तो रुक गया। "यह कैसी आवाज़ है?" शेर ने सोचा, "इस जंगल में जरूर कोई बहुत बड़ा और ताकतवर जानवर आया है!" कुछ देर बाद शेर के दो सियार साथियों ने उसे परेशान देखा, तो उन्होंने पूछा, "महाराज, आप इतने डरे हुए क्यों हैं?" शेर ने उन्हें उस अजीब आवाज़ के बारे में बताया।

एक सियार बोला, "महाराज, आप चिंता मत कीजिए, हम पता लगाते हैं कि वह आवाज़ किसकी है।" दोनों सियार आवाज़ की दिशा में गए, और वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि वह आवाज़ किसी भयानक जानवर की नहीं. बल्कि एक बैल की थी! वे वापस शेर के पास आए और हँसते हुए बोले, "महाराज, डरने की कोई बात नहीं है, वह आवाज़ एक बैल की है।" शेर ने बैल को अपने पास बुलवाया, और जल्द ही दोनों की बातचीत होने लगी। बैल समझदार था और शेर को उसकी बातें बहुत अच्छी लगीं, धीरे-धीरे... शेर और बैल अच्छे दोस्त बन गए।

दोनों रोज़ साथ बैठते, ढेर सारी बातें करते, और कुछ ही समय में बैल शेर का बहुत करीबी दोस्त बन गया। लेकिन दोनों सियारों को यह दोस्ती बिल्कुल पसंद नहीं आई। पहले शेर अपना बहुत-सा समय उनके साथ बिताता था, पर अब वह ज्यादातर बैल के साथ रहने लगा था।

एक सियार ने दूसरे से कहा, "अगर ऐसा ही चलता रहा, तो राजा को हमारी जरूरत ही नहीं रहेगी।" फिर दोनों ने शेर और बैल की दोस्ती तोड़ने की चाल चली। एक सियार शेर के पास गया और धीरे से बोला, "महाराज... मुझे आपको एक जरूरी बात बतानी है।" शेर ने पूछा, "क्या बात है?" सियार फुसफुसाकर बोला, "जिस बैल को आप अपना दोस्त समझते हैं, वह आपका राज्य छीनना चाहता है।"

शेर चौंक गया, "क्या? मेरा मित्र ऐसा क्यों करेगा?" सियार बोला, "महाराज, सावधान रहना ही अच्छा है।" बस, शेर के मन में शक का एक छोटा-सा बीज पड़ गया। अब वही सियार बैल के पास पहुँचा। उसने कहा, "तुम्हें पता है? शेर तुमसे नाराज़ है, मुझे डर है कि वह तुम्हें मारने की सोच रहा है।" बैल हैरान रह गया, "लेकिन शेर तो मेरा मित्र है!" सियार धीरे से बोला, "मैं तो बस तुम्हें सावधान कर रहा हूँ।" अब बैल के मन में भी डर बैठ गया।

अगले दिन जब शेर और बैल आमने-सामने आए... दोनों एक-दूसरे को शक की नज़र से देखने लगे। शेर ने सोचा, "शायद सियार सच कह रहा था," और बैल ने सोचा, "शायद शेर सच में मुझे मारना चाहता है।" दोस्ती की जगह डर और शक ने ले ली। अचानक दोनों के बीच लड़ाई शुरू हो गई, शेर और बैल पूरी ताकत से एक-दूसरे से भिड़ गए। लड़ाई बहुत भयंकर थी, और आखिरकार शेर ने बैल को मार दिया। लेकिन बैल को मारने के बाद शेर का गुस्सा शांत हुआ, तो उसे अपने दोस्त की याद आने लगी। अब उसे समझ आया कि उसने दूसरों की बातों में आकर अपने ही मित्र पर शक कर लिया था।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि दोनों चालाक सियारों ने अपने स्वार्थ के लिए दो अच्छे दोस्तों को अलग कर दिया था। अगर शेर और बैल एक-दूसरे से सीधे बात कर लेते... तो शायद उनकी दोस्ती कभी नहीं टूटती। लेकिन जंगल से दूर एक तालाब के किनारे एक बूढ़ा बगुला बैठा रो रहा था। एक केकड़े ने पूछा, "आप रो क्यों रहे हैं?" और बगुले ने ऐसी बात बताई कि केकड़ा भी चौंक गया...

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