महल के कमरे में सोते हुए राजा के पास तलवार उठाए खड़ा बंदर और उड़ती हुई मक्खी

मूर्ख दोस्त

Beginner · ≈ 3 min story · 2 min read

राजा का सबसे प्यारा दोस्त एक बंदर था। एक दिन राजा की मदद करने के चक्कर में बंदर ने बिना सोचे ऐसा काम कर दिया, जिससे राजा को ही नुकसान हो गया। यह कहानी सिखाती है कि मदद करने से पहले सोचना भी ज़रूरी है। कहानी के अंत में एक दो सिर वाले पक्षी की नई कहानी भी शुरू होती है।

एक बार की बात है। एक राजा था, और उसका एक बहुत प्यारा दोस्त था. एक बंदर। राजा उस बंदर पर बहुत भरोसा करता था। बंदर भी राजा से बहुत प्यार करता था। राजा जहाँ जाता, बंदर अक्सर उसके साथ रहता। कभी वह राजा के साथ बगीचे में घूमता, कभी महल में उसके पास बैठता। दोनों की दोस्ती देखकर लगता था कि वे कभी अलग ही नहीं होते। एक दिन दोपहर के समय राजा अपने कमरे में आराम कर रहा था। कुछ ही देर में उसकी आँख लग गई और वह गहरी नींद में सो गया। बंदर पास ही बैठकर उसकी रखवाली कर रहा था। तभी... एक मक्खी उड़ती हुई कमरे में आई। वह सीधे राजा के पास पहुँची और उसकी छाती पर बैठ गई। बंदर ने उसे देखा। "हट! यहाँ से भाग!" बंदर ने हाथ हिलाकर मक्खी को उड़ा दिया। मक्खी उड़ गई... लेकिन थोड़ी ही देर में वह फिर लौट आई और राजा की छाती पर बैठ गई। बंदर ने फिर उसे भगाया। मगर मक्खी भी बड़ी जिद्दी थी। बंदर जितनी बार उसे भगाता... वह उतनी ही बार वापस आकर राजा पर बैठ जाती। अब बंदर परेशान हो गया। "अच्छा! तू ऐसे नहीं मानेगी?" उसकी नज़र पास रखी राजा की तलवार पर पड़ी। उसने तलवार उठा ली। अब बंदर पूरे कमरे में तलवार लेकर मक्खी के पीछे-पीछे घूमने लगा। मक्खी कभी इधर उड़ती... कभी उधर... और फिर एक बार राजा की छाती पर आकर बैठ गई। बंदर ने उसे देखा और तलवार कसकर पकड़ ली। "अब देखना! इस बार तुम बच नहीं पाओगी!" उसने बिना सोचे-समझे पूरी ताकत से तलवार चला दी। लेकिन मक्खी फुर्रर्र से उड़ गई! और तलवार... सीधे राजा को जा लगी। राजा बुरी तरह घायल हो गया। बंदर वहीं खड़ा रह गया। वह तो अपने दोस्त की मदद करना चाहता था... लेकिन बिना सोचे किए गए उसके काम ने राजा को ही नुकसान पहुँचा दिया। कभी-कभी केवल किसी का अच्छा दोस्त होना ही काफी नहीं होता। मदद करने से पहले यह सोचना भी जरूरी है कि हमारे काम से कहीं नुकसान तो नहीं होगा। और इसी सीख के साथ राजा और बंदर की कहानी यहीं खत्म होती है। लेकिन... उसी महल से बहुत दूर, एक घने जंगल में एक और अजीब कहानी शुरू होने वाली थी। वहाँ एक ऐसा पक्षी रहता था, जिसके एक नहीं... दो सिर थे! दोनों सिर एक ही शरीर के थे, फिर भी हर बात पर झगड़ते रहते थे। एक दिन उनमें से एक सिर को पेड़ पर एक बहुत स्वादिष्ट फल दिखाई दिया। दूसरे सिर ने कहा, "मुझे भी थोड़ा देना!" लेकिन पहले सिर ने फल बाँटने से साफ मना कर दिया। दूसरा सिर चुप तो हो गया... पर वह इस बात को भूला नहीं। और कुछ दिनों बाद, उसकी नज़र एक ऐसे फल पर पड़ी... जिसे खाना बहुत खतरनाक था। अब वह उस फल के साथ क्या करने वाला था?

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