
कबूतर और बहेलिया
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भूखे कबूतरों का एक झुंड चावल के दाने देखकर नीचे उतरता है और बहेलिये के जाल में फँस जाता है। सरदार सबको शांत रखता है और एक साथ पंख फड़फड़ाने की तरकीब बताता है। सब मिलकर जाल समेत उड़ जाते हैं, और चूहा मित्र जाल काटकर सबको आज़ाद कर देता है।
एक बार बहुत सारे कबूतर आसमान में उड़ रहे थे। काफी देर तक उड़ते-उड़ते उन्हें भूख लगने लगी, तभी उनकी नज़र नीचे जमीन पर बिखरे हुए चावल के दानों पर पड़ी। एक कबूतर चहकते हुए बोला, "देखो! नीचे कितने सारे चावल हैं। चलो, उन्हें खा लेते हैं!" कबूतरों के सरदार ने नीचे ध्यान से देखा, और उसे कुछ ठीक नहीं लगा।
सरदार ने फिक्र भरी आवाज़ में कहा, "रुको! मुझे लगता है कि वहाँ कोई खतरा हो सकता है। हमें नीचे नहीं जाना चाहिए।" लेकिन बाकी कबूतर बहुत भूखे थे, इसलिए वे सरदार की बात न मानकर नीचे उतर गए। जैसे ही कबूतरों ने चावल चुगना शुरू किया... अचानक सब कुछ बदल गया।
एक बड़ा-सा जाल उन पर आ गिरा! सभी कबूतर जाल में फँस गए, और वे घबराकर अपने पंख फड़फड़ाने लगे। कबूतर घबराकर बोले, "हम फँस गए! अब क्या करें? हम यहाँ से कैसे निकलेंगे?" तभी उन्होंने दूर से बहेलिये को अपनी ओर आते देखा, और वह बहुत खुश था।
बहेलिया हँसते हुए बोला, "वाह! आज तो इतने सारे कबूतर एक साथ मिल गए!" कबूतर और भी घबरा गए, लेकिन उनका सरदार शांत रहा। सरदार ने धीरे से कहा, "घबराओ मत। अगर हम सब अलग-अलग निकलने की कोशिश करेंगे, तो नहीं बच पाएँगे। लेकिन अगर हम सब एक साथ अपनी पूरी ताकत लगाएँ, तो हम इस जाल को लेकर ही उड़ सकते हैं!"
सभी कबूतरों ने उसकी बात मान ली। सरदार ने पूछा, "तैयार?" और फिर सबने साथ गिना, "एक... दो... तीन!" सभी कबूतरों ने एक साथ अपने पंख फड़फड़ाए, फड़-फड़-फड़-फड़! और देखते ही देखते, पूरा जाल जमीन से ऊपर उठ गया! बहेलिया यह देखकर हैरान रह गया, और वह कबूतरों के पीछे दौड़ने लगा। लेकिन कबूतर एक साथ उड़ते रहे, और कुछ देर बाद बहेलिया थक गया और रुक गया।
कबूतरों ने राहत की साँस ली, लेकिन वे अभी भी जाल में फँसे हुए थे। सरदार बोला, "मेरे एक चूहे मित्र का घर पास ही है। वह अपने तेज दाँतों से इस जाल को काट सकता है।" वे सब जाल सहित उसके पास पहुँचे। चूहे ने अपने दोस्त को जाल में फँसा देखा, तो तुरंत बाहर आया। उसने जाल की रस्सियाँ कुतरनी शुरू कर दीं, कुतर-कुतर-कुतर, और थोड़ी ही देर में जाल कट गया।
एक-एक करके सारे कबूतर आज़ाद हो गए! सभी ने चूहे को धन्यवाद दिया और खुशी-खुशी उड़ गए। उस दिन कबूतरों ने समझा कि मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो... अगर सब मिलकर एक साथ कोशिश करें, तो उससे बाहर निकला जा सकता है। लेकिन जंगल की एक दूसरी कहानी में, एक सियार राजा के सामने सिर झुकाकर खड़ा था। राजा उससे पूछ रहा था, "महाराज बनने के लिए कौन-से गुण जरूरी हैं?" सियार क्या जवाब देगा?
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