
बेईमान कर्ज़दार
Intermediate · ≈ 5 min story · 3 min read
एक किसान की फसल बर्बाद हो जाती है और वह एक दयालु साहूकार से सौ सोने के सिक्के उधार लेता है, बंधपत्र पर हस्ताक्षर करके। तीन महीने बाद जब लौटाने का समय आता है, तो वह चालाकी से बंधपत्र आग में जला देता है और अदालत में कहता है कि ऐसा कोई कागज़ कभी था ही नहीं। सबूत तो राख हो चुका है, फिर सच कैसे सामने आएगा? मर्यादा राम सिर्फ एक अनपेक्षित सवाल पूछते हैं, और किसान अपने ही झूठ में फंस जाता है। छोटे बच्चों के लिए ईमानदारी, बुद्धिमानी और न्याय की एक शांत, समझने में आसान कहानी।
एक बार की बात है... एक व्यस्त राज्य में... एक मेहनती किसान रहता था। एक साल... उसकी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। उसे पैसों की बहुत ज़रूरत थी। इसलिए उसने... एक दयालु साहूकार से... एक सौ सोने के सिक्के उधार लिए। किसान ने एक लिखित बंधपत्र पर हस्ताक्षर किए...
और वादा किया कि... वह तीन महीने के भीतर... पूरी रकम वापस कर देगा। साहूकार ने उस पर भरोसा किया... और खुशी-खुशी उसे पैसे दे दिए। तीन महीने बीत गए। फसल का समय भी खत्म हो चुका था। एक दिन... साहूकार किसान के पास आया और बोला,
"मेरे मित्र... अब समय आ गया है। कृपया मेरे पैसे... और तय किया हुआ ब्याज... मुझे वापस कर दो।"
किसान मुस्कुराया।
"बिल्कुल। आप कल मेरे घर आइए। बंधपत्र भी साथ ले आइए... मैं आपको पूरी रकम लौटा दूंगा।"
साहूकार ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया। अगली सुबह... वह बंधपत्र लेकर किसान के घर पहुंचा। किसान ने कागज़ को ध्यान से देखा।
"हम्म... इसमें शायद कोई गलती है। मुझे इसे ठीक से देखने दो।"
भरोसेमंद साहूकार ने... बंधपत्र उसके हाथ में दे दिया। अचानक... किसान सीधे चूल्हे के पास गया... और उसने बंधपत्र... जलती हुई आग में फेंक दिया। कागज़ देखते ही देखते... जलकर राख हो गया। साहूकार हैरान रह गया। वह चिल्लाया,
"तुमने यह क्या किया?"
किसान हंसने लगा।
"अब मैं यह सुनिश्चित कर रहा हूं... कि तुम दोबारा... मुझसे इन पैसों की मांग नहीं कर सकोगे।"
बेचारा साहूकार... तुरंत मर्यादा राम के पास पहुंचा। उसने उन्हें पूरी बात बता दी। कुछ ही समय बाद... किसान को अदालत में बुलाया गया। मर्यादा राम ने पूछा,
"तुमने बंधपत्र क्यों जलाया?"
किसान ने अपनी बाहें मोड़ लीं।
"कौन-सा बंधपत्र? मुझे किसी बंधपत्र के बारे में कुछ नहीं पता। यह आदमी झूठ बोल रहा है।"
मर्यादा राम चुपचाप... उसका चेहरा देखते रहे। फिर उन्होंने कहा,
"तुम दोनों कल फिर अदालत में आना।"
किसान मन ही मन मुस्कुराया।
"अब बंधपत्र तो बचा ही नहीं... यह आदमी मुझे कभी कुछ साबित नहीं कर पाएगा।"
उस शाम... मर्यादा राम ने चुपचाप... साहूकार को अपने पास बुलाया। उन्होंने पूछा,
"मुझे बताओ... वह बंधपत्र कितना बड़ा था?"
साहूकार ने जवाब दिया,
"लगभग मेरे हाथ जितना लंबा था।"
मर्यादा राम ने सिर हिलाया।
"कल जब मैं तुमसे पूछूं... तो कहना कि वह... तुम्हारी बांह जितना लंबा था।"
साहूकार थोड़ा हैरान हुआ... लेकिन उसे बुद्धिमान मर्यादा राम पर पूरा भरोसा था। अगले दिन... दोनों फिर अदालत में पहुंचे। मर्यादा राम ने सबसे पहले... साहूकार की ओर देखा।
"अदालत को बताओ... वह बंधपत्र कितना बड़ा था?"
साहूकार ने जवाब दिया,
"वह मेरी बांह जितना लंबा था।"
इससे पहले कि कोई और कुछ कहता... किसान जोर से चिल्लाया,
"यह झूठ है! वह तो सिर्फ हाथ जितना लंबा था!"
पूरी अदालत... एकदम शांत हो गई। मर्यादा राम हल्के से मुस्कुराए।
"अच्छा? कल तो तुमने कहा था... कि ऐसा कोई बंधपत्र कभी था ही नहीं। तो फिर... तुम्हें यह कैसे पता... कि वह ठीक कितना लंबा था?"
किसान का चेहरा... पीला पड़ गया। उसे समझ आ गया... कि वह खुद ही अपने झूठ में फंस चुका था। धीरे-धीरे... उसने अपना सिर झुका लिया।
"मुझे माफ कर दीजिए... मैंने झूठ बोला था। मैंने पैसे उधार लिए थे। मैंने बंधपत्र जला दिया... ताकि मुझे अपना कर्ज़ वापस न करना पड़े।"
मर्यादा राम ने शांत स्वर में कहा,
"सबूत मिटाने की कोशिश करने से... सच्चाई नहीं मिटती।"
उन्होंने किसान को आदेश दिया... कि वह साहूकार के... पूरे एक सौ सोने के सिक्के... और तय किया हुआ ब्याज... उसे वापस करे। और क्योंकि उसने... अदालत के सामने झूठ बोला था... इसलिए उसकी बेईमानी के लिए... उसे उचित दंड भी दिया गया। कृतज्ञ साहूकार ने... मर्यादा राम को धन्यवाद दिया।
पूरे राज्य के लोगों ने... उनकी बुद्धिमानी और न्यायप्रियता की प्रशंसा की। और उस दिन के बाद... लोग एक महत्वपूर्ण बात याद रखने लगे। बच्चों... झूठ कुछ समय के लिए... सच्चाई को छिपा सकता है... लेकिन अंत में... ईमानदारी की ही जीत होती है।
More bedtime stories

मरा हुआ हाथी और टूटे हुए घड़े
अपने बेटे की शादी के लिए एक व्यक्ति अपने मित्र से हाथी उधार लेता है, पर लौटते समय हाथी बीमार पड़कर मर जाता है। मालिक मुआवज़ा लेने से इनकार कर देता है और ज़िद पकड़ लेता है कि उसे वही हाथी जीवित वापस चाहिए। मामला मर्यादा राम के दरबार पहुँचता है, जहाँ वे समझाने के बजाय एक ऐसा उपाय करते हैं कि मिट्टी के पुराने घड़े टूटने पर ज़िद्दी मालिक खुद ही समझ जाता है कि जो टूट गया या खो गया, वह पहले जैसा नहीं हो सकता। अंत में दोनों मित्र एक-दूसरे को क्षमा कर शांति से घर लौटते हैं।

मुर्गी चुराने वाली लालची पड़ोसन
एक ईमानदार औरत की प्यारी मुर्गी दाना चुगते-चुगते पड़ोस के घर में चली जाती है, और लालची पड़ोसन उसे पकाकर खा जाती है। पूछने पर वह साफ़ मुकर जाती है और कहती है कि उसने मुर्गी देखी तक नहीं। सबूत न होने पर मुर्गी की मालकिन मर्यादा राम की अदालत पहुँचती है। मर्यादा राम एक छोटी-सी चतुर तरकीब से, बिना किसी गवाह के, झूठ को सबके सामने खोल देते हैं। 5 से 8 साल के बच्चों के लिए सोने से पहले सुनाने लायक एक मज़ेदार और समझदारी सिखाती कहानी।

ब्राह्मण का सोना
एक वृद्ध ब्राह्मण और उनकी पत्नी तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले अपनी जीवनभर की कमाई, सोने के सिक्के, दाल से भरे पीतल के घड़े में छिपाकर पड़ोसी के पास रख जाते हैं। पड़ोसी को सच्चाई का पता चलता है और लालच उसे बेईमान बना देता है। लौटने पर ब्राह्मण को सिर्फ दाल मिलती है और पड़ोसी सब कुछ जानने से इनकार कर देता है। तब मर्यादा राम बाँस की एक खोखली देवी मूर्ति और एक होशियार बच्चे की मदद से ऐसी तरकीब रचते हैं कि सच खुद बाहर आ जाता है। सोना लौटाया जाता है और पूरा राज्य सीखता है कि भरोसा ही सबसे बड़ी दौलत है।

चूहा और साधु
एक शांत मंदिर के पास रहने वाले साधु का सादा जीवन तब उलट-पुलट हो जाता है, जब एक नन्हा चूहा हर रात उनका भोजन चुराने लगता है। साधु खाना छिपाते हैं, ऊँची जगह पर लटकाते हैं, पर चूहा हर बार छलांग लगाकर वहाँ पहुँच ही जाता है। तभी एक विद्वान पंडित आते हैं और एक सीधा सवाल पूछते हैं: इस छोटे-से चूहे में इतनी ताकत आती कहाँ से है? दोनों धैर्य के साथ चूहे का पीछा करते हैं और उसके बिल में छिपा जमा किया हुआ भोजन खोज निकालते हैं। यही उसकी असली ताकत का राज़ था। यह कोमल कहानी बच्चों को सिखाती है कि किसी भी समस्या से घबराने के बजाय पहले उसकी जड़ समझनी चाहिए, क्योंकि सच्ची जीत ताकत से नहीं, समझदारी से मिलती है।