एक वृद्ध ब्राह्मण अपना पीतल का घड़ा पड़ोसी को सौंपते हुए, और घड़े में दाल के नीचे छिपे सोने के चमकते सिक्के।

ब्राह्मण का सोना

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एक वृद्ध ब्राह्मण और उनकी पत्नी तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले अपनी जीवनभर की कमाई, सोने के सिक्के, दाल से भरे पीतल के घड़े में छिपाकर पड़ोसी के पास रख जाते हैं। पड़ोसी को सच्चाई का पता चलता है और लालच उसे बेईमान बना देता है। लौटने पर ब्राह्मण को सिर्फ दाल मिलती है और पड़ोसी सब कुछ जानने से इनकार कर देता है। तब मर्यादा राम बाँस की एक खोखली देवी मूर्ति और एक होशियार बच्चे की मदद से ऐसी तरकीब रचते हैं कि सच खुद बाहर आ जाता है। सोना लौटाया जाता है और पूरा राज्य सीखता है कि भरोसा ही सबसे बड़ी दौलत है।

एक समय की बात है... एक शांत से गाँव में... एक वृद्ध ब्राह्मण... और उनकी पत्नी रहते थे। उन्होंने... पूरी ज़िंदगी... कड़ी मेहनत करके... सोने के बहुत से सिक्के बचाए थे। एक दिन... उन्होंने तीर्थ यात्रा... पर जाने का निश्चय किया। ब्राह्मण ने... अपने सारे सोने के सिक्के... एक बड़े पीतल के घड़े में रखे।

फिर... उन्होंने उन सिक्कों को... ऊपर से दाल से ढक दिया। वे मुस्कुराकर बोले,

"अब किसी को... अंदर का राज़... पता नहीं चलेगा।"

यात्रा पर निकलने से पहले... वे घड़ा... अपने पड़ोसी के घर ले गए।

"मित्र... जब तक हम लौटें... कृपया इसे संभालकर रखना।"

पड़ोसी ने कहा,

"निश्चिंत रहिए। यह बिल्कुल सुरक्षित रहेगा।"

ब्राह्मण और उनकी पत्नी... निश्चिंत होकर... तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े। कुछ दिन बाद... पड़ोसी के घर... अचानक बहुत से मेहमान आ गए। उसकी पत्नी घबरा गई।

"घर में... कुछ भी खाने को नहीं है। और बाज़ार जाने में... अब बहुत देर हो चुकी है।"

तभी... पड़ोसी की नज़र... ब्राह्मण के घड़े पर पड़ी। उसने कहा,

"चलो... थोड़ी-सी दाल निकाल लेते हैं। कल वापस भर देंगे।"

जैसे ही... उसने घड़ा उल्टा किया... दाल के साथ... सोने के चमचमाते सिक्के... बाहर गिरने लगे। दोनों की आँखें... फटी की फटी रह गईं।

"इतना सारा सोना!"

पत्नी फुसफुसाई। धीरे-धीरे... लालच... उनके मन पर छा गया। पत्नी बोली,

"सोना अपने पास रख लेते हैं। और घड़े में... नई दाल भर देंगे।"

पति भी... लालच में आ गया। उन्होंने... सारा सोना छिपा दिया... और घड़ा... फिर से दाल से भर दिया। कई सप्ताह बाद... ब्राह्मण... और उनकी पत्नी लौट आए। उन्होंने... अपना घड़ा लिया... और घर आ गए। जब घड़ा खाली किया... तो उसमें... सिर्फ दाल थी। सोना... गायब था। दोनों की आँखों में...

आँसू आ गए। वे तुरंत... पड़ोसी के घर पहुँचे।

"हमारा सोना... कृपया लौटा दीजिए। हमने आप पर भरोसा किया था।"

लेकिन... पड़ोसी बोला,

"कैसा सोना? आप तो... दाल का घड़ा छोड़कर गए थे। मुझे... कुछ नहीं पता।"

बेबस होकर... ब्राह्मण... मर्यादा राम के दरबार पहुँचे। मर्यादा राम ने... पूरी बात... ध्यान से सुनी। फिर पूछा,

"क्या किसी ने... सोना रखते हुए देखा था?"

ब्राह्मण ने... दुखी होकर कहा,

"नहीं महाराज। मैंने... अपने पड़ोसी पर भरोसा किया था।"

मर्यादा राम... कुछ देर सोचते रहे। फिर... उनके चेहरे पर... हल्की मुस्कान आई। उन्होंने... एक टोकरी बनाने वाले को बुलाया। और कहा,

"मेरे लिए... बाँस की... एक खोखली देवी की मूर्ति बनाओ। इतनी बड़ी... कि उसके अंदर... एक बच्चा बैठ सके।"

मूर्ति तैयार हुई। मर्यादा राम ने... एक होशियार बच्चे को बुलाया। उसे... मूर्ति के अंदर बैठाकर कहा,

"बिल्कुल शांत रहना। और जो कुछ भी सुनो... ध्यान से सुनना।"

फिर... उन्होंने... बेईमान पड़ोसी... और उसकी पत्नी को बुलाया। उन्होंने कहा,

"इस देवी की मूर्ति को... मंदिर की परिक्रमा कराओ। फिर देवी माँ के सामने... शपथ लेकर कहना... कि तुमने... ब्राह्मण का सोना नहीं चुराया।"

डरते-डरते... दोनों... मूर्ति उठाकर... मंदिर की परिक्रमा करने लगे। जब वे... मंदिर के एक सुनसान हिस्से में पहुँचे... पति... पत्नी से गुस्से में बोला,

"देखो... तुम्हारी वजह से... अब हमें... देवी माँ के सामने भी... झूठ बोलना पड़ेगा। वे हमें... कभी माफ़ नहीं करेंगी।"

मूर्ति के अंदर बैठा... बच्चा... सब कुछ सुन रहा था। जब वे... दरबार लौटे... तो बच्चे को... मूर्ति से बाहर निकाला गया। उसने... सबके सामने... एक-एक बात... वैसी ही दोहरा दी... जैसी उसने सुनी थी। पूरा दरबार... स्तब्ध रह गया। पड़ोसी... और उसकी पत्नी... समझ गए... कि उनका भेद खुल चुका है।

वे... मर्यादा राम के चरणों में गिर पड़े।

"महाराज... हमें क्षमा कर दीजिए। हमने ही... सोना चुराया था।"

मर्यादा राम ने... शांत स्वर में कहा,

"सबसे पहले... ब्राह्मण का... पूरा सोना वापस करो। और क्योंकि... तुमने भरोसा तोड़ा है... इसलिए तुम्हें... उचित दंड भी मिलेगा।"

दोनों ने... सारा सोना... ब्राह्मण को लौटा दिया। वृद्ध दंपति... बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने... मर्यादा राम का... हृदय से धन्यवाद किया। उस दिन के बाद... पूरे राज्य ने... एक बात सीख ली। लालच... कुछ समय के लिए... सच्चाई को छिपा सकता है। लेकिन... बुद्धिमानी... आख़िरकार... सच्चाई को सामने ले ही आती है।

बच्चों... भरोसा दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है। जो दूसरों के विश्वास की रक्षा करता है... वही वास्तव में सबसे अमीर होता है। और जो लालच में आकर... भरोसा तोड़ देता है... वह सबसे बड़ी दौलत खो देता है।

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