मूर्ख ग्वालिनसपने देखना अच्छी बात है, पर सपनों में खोकर अपने कदमों का ध्यान भूल जाना समझदारी नहीं।

मूर्ख ग्वालिन

Intermediate · ≈ 4 min story · 2 min read

एक ग्वालिन सिर पर दूध का मटका रखकर बाज़ार जाती है और रास्ते भर सोचती जाती है कि दूध के पैसों से वह चूजे खरीदेगी, फिर बकरियाँ, फिर गायें और एक दिन बहुत अमीर बन जाएगी। सपनों में खोई-खोई वह रास्ते का ध्यान भूल जाती है, उसका पैर एक पत्थर से टकराता है और मटका टूटकर सारा दूध ज़मीन पर बिखर जाता है। यह छोटी-सी पुरानी कहानी बच्चों को बहुत कोमल तरीके से समझाती है कि सपने देखना अच्छा है, पर उन्हें सच करने के लिए मेहनत और समझदारी भी ज़रूरी है।

एक समय की बात थी। एक छोटे से गाँव में एक ग्वालिन रहती थी। वह अपने सिर पर दूध का बड़ा-सा मटका रखकर, उसे बेचने के लिए बाज़ार की ओर जा रही थी। रास्ते में चलते-चलते वह दूध बेचकर मिलने वाले पैसों के बारे में सोचने लगी। और तभी अचानक, उसके मन में एक सुंदर-सा सपना आया।

वह मन ही मन मुस्कुराकर बोली, "जब मैं यह सारा दूध बेच दूँगी, तो मुझे अच्छे पैसे मिलेंगे, और उन पैसों से मैं सौ चूजे खरीदूँगी।" आगे बढ़ते हुए उसने खुद से कहा, "जब वे चूजे बड़े हो जाएँगे, तो उन्हें अच्छे दामों में बेच दूँगी, और फिर उन पैसों से मैं दो बकरियाँ खरीदूँगी।"

वह चहककर बोली, "जब बकरियाँ बड़ी हो जाएँगी, तो उन्हें भी अच्छे दामों में बेच दूँगी! फिर मैं दो गाय खरीद लूँगी।" ग्वालिन अपने सपनों में इतनी खो गई कि उसे रास्ते का कुछ ध्यान ही नहीं रहा। पैर चलते रहे, मगर मन कहीं दूर, किसी और ही दुनिया में घूम रहा था।

वह आगे सोचने लगी, "गायों का दूध बेचकर मैं खूब पैसे कमाऊँगी, फिर मेरे पास बहुत सारा धन होगा, और मैं सुखपूर्वक अपना जीवन बिताऊँगी।" यह सोचकर ग्वालिन बहुत खुश हो गई। वह अपने भविष्य की कल्पना करते हुए मन ही मन झूमने लगी, और उसके कदम हवा में तैरने लगे।

तभी अचानक. उसका पैर एक पत्थर से टकरा गया। "अरे!" वह हड़बड़ाकर चिल्लाई, मगर संभल नहीं पाई। धड़ाम! ग्वालिन ज़मीन पर गिर पड़ी। उसके सिर पर रखा दूध का मटका भी ज़मीन पर आ गिरा। मटका टूट गया, और सारा दूध ज़मीन पर फैलता चला गया। ग्वालिन कुछ देर तक अपने टूटे हुए मटके और बिखरे दूध को चुपचाप देखती रही। उसके सारे सपने एक ही पल में चूर-चूर हो चुके थे।

फिर वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। "हाय! अब मैं कभी चूजे नहीं खरीद पाऊँगी, न बकरियाँ, और न ही गायें!" उसने सिसकते हुए कहा। रोते-रोते उसे समझ आ गया कि जो कुछ उसने पाया भी नहीं था, उसे पाने से पहले ही वह उसके बारे में सपने देखना शुरू कर चुकी थी। उस दिन ग्वालिन ने एक बड़ी सीख सीखी।

बच्चों, सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ़ सपने देखते रहना और बिना सोचे-समझे उन पर भरोसा कर लेना बुद्धिमानी नहीं है। हमें अपने लक्ष्य के लिए कल्पना के साथ-साथ मेहनत और समझदारी से कदम भी उठाने चाहिए। तभी सपने सच होते हैं, धीरे-धीरे, एक-एक कदम करके...

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