पानी पर बहते हरे पत्ते पर चढ़ी एक नन्ही चींटी, और ऊपर पेड़ की डाल से उसे देखती हुई कोयल

चींटी और कोयल

Beginner · ≈ 4 min story · 2 min read

भीषण गर्मी में पानी की तलाश में निकली एक नन्ही चींटी नाले में गिर जाती है और डूबने लगती है, तभी पेड़ पर बैठी कोयल पत्ता गिराकर उसकी जान बचा लेती है। दोनों गहरे दोस्त बन जाते हैं, और एक दिन जब शिकारी कोयल को जाल में पकड़ लेता है, तो वही छोटी-सी चींटी उसके पैर पर काटकर अपनी दोस्त को छुड़ा लेती है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि किया हुआ हर नेक काम कभी न कभी लौटकर जरूर आता है।

एक बार की बात है, जंगल में बहुत भयंकर गर्मी पड़ रही थी। एक छोटी-सी चींटी पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रही थी, और उसका नन्हा-सा गला सूखा जा रहा था। कुछ देर चलने के बाद वह एक नाले के पास पहुँची। वहाँ उसे चमकता हुआ पानी दिखाई दिया, और वह खुश होकर पानी पीने के लिए घास के एक पतले तिनके पर चढ़ गई।

लेकिन अभी वह नीचे उतरी भी नहीं थी कि अचानक उसका पैर फिसल गया, और वह सीधे पानी में जा गिरी! चींटी पानी में हाथ-पैर मारने लगी, छटपटाने लगी, मगर वह तैरना नहीं जानती थी। वह डूबने ही वाली थी कि तभी पेड़ पर बैठी एक कोयल की नजर उस पर पड़ गई। कोयल ने चींटी को पानी में छटपटाते देखा, और उसका दिल घबरा उठा।

उसने तुरंत एक पत्ता तोड़ा, नाले की ओर उड़ी, और चींटी के पास वह पत्ता फेंक दिया। चींटी किसी तरह घिसटती हुई, हाँफती हुई उस पत्ते पर चढ़ गई। पत्ता धीरे-धीरे बहता हुआ किनारे तक पहुँच गया, और चींटी की जान बच गई। उसने कोयल की ओर देखा, और मन ही मन उसका धन्यवाद किया।

उसने धीरे से सोचा, "कोयल ने आज मेरी जान बचाई है, इसलिए मैं भी कभी न कभी उसकी मदद जरूर करूँगी।" यह वादा उसने अपने नन्हे-से दिल में सँभालकर रख लिया। समय बीतता गया, और चींटी और कोयल अच्छे दोस्त बन गए। दोनों अक्सर एक-दूसरे के पास बैठकर समय बिताते, बातें करते, और साथ-साथ खूब हँसते थे।

एक दिन जंगल में एक शिकारी आया। पेड़ों के बीच छिपते हुए वह चुपचाप आगे बढ़ा, और तभी उसने कोयल को देख लिया. उसकी आँखें चमक उठीं। शिकारी ने जल्दी से अपना जाल बिछाया, दबे पाँव आगे बढ़ा, और कोयल को पकड़ लिया। कोयल फड़फड़ाती रही, जोर लगाती रही, मगर जाल से निकल न सकी।

लेकिन चींटी ने यह सब देख लिया था। वह तुरंत दौड़कर शिकारी के पास पहुँची, उसके पैर पर चढ़ी, और पूरी ताकत से काट लिया। शिकारी दर्द से तिलमिला उठा, जोर से चिल्लाया, और उसका ध्यान जाल से हट गया! उसी पल कोयल को मौका मिल गया, और वह जाल से निकलकर फुर्र से उड़ गई।

कोयल की जान बच गई थी। उसने दूर पेड़ पर जाकर अपनी दोस्त चींटी को देखा, जो नीचे खुशी से इधर-उधर घूम रही थी। दोनों समझ गए कि सच्ची दोस्ती सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं है। सच्ची दोस्ती तो मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देने का नाम है।

बच्चों, अगर कोई हमारे लिए अच्छा काम करता है, तो हमें भी उसकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। क्योंकि छोटी-सी मदद भी किसी के लिए बहुत बड़ी बन सकती है। नैतिक शिक्षा यह है कि किसी भी नेक काम के बदले नेक ही मिलता है। इसलिए दूसरों की मदद हमेशा दिल से करनी चाहिए, बिना कुछ माँगे, बिना कुछ सोचे...

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