
बच्चे का नजरिया
Intermediate · ≈ 4 min story · 2 min read
एक बूढ़े पिता के काँपते हाथों से खाना गिरने और बर्तन टूटने लगते हैं, तो घरवाले उन्हें मेज से दूर बिठाकर लकड़ी की प्लेट और कटोरी में खाना देने लगते हैं। घर का चार साल का बच्चा यह सब चुपचाप देखता रहता है। एक शाम वह लकड़ी के टुकड़ों से जो बना रहा होता है, उसकी वजह सुनकर माता-पिता के चेहरे की मुस्कान गायब हो जाती है और उन्हें अपनी गलती का एहसास हो जाता है।
एक समय की बात है, एक घर में एक बूढ़ा और कमजोर आदमी रहता था। वह अपने बेटे, बहू और चार साल के छोटे पोते के साथ उसी घर में अपने दिन बिताता था। उम्र बढ़ने के कारण उसके हाथ-पैर हर वक्त काँपते रहते थे, और उसकी नजर भी धीरे-धीरे धुंधली हो चुकी थी। चलते समय उसके कदम अक्सर लड़खड़ा जाते थे।
पूरा परिवार हर दिन एक साथ बैठकर खाना खाता था। लेकिन बूढ़े दादा के लिए खाना खाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा था। कभी उनके काँपते हाथों से खाना नीचे गिर जाता, तो कभी मेज पर रखा बर्तन उनसे टूट जाता। दो-तीन बार ऐसा होने के बाद घरवालों ने आपस में सोचा, "अब इन्हें लकड़ी की प्लेट और कटोरी में ही खाना देना चाहिए।"
उस दिन से बूढ़े दादा को मेज से थोड़ा दूर बिठाया जाने लगा, और उन्हें लकड़ी की प्लेट और कटोरी में खाना दिया जाने लगा। घर का छोटा बच्चा यह सब चुपचाप देख रहा था। वह कुछ नहीं बोला, लेकिन उसके नन्हे मन में यह बात गहरी बैठ गई।
एक दिन शाम के समय, खाने से पहले, उसके पिता ने देखा कि उनका बेटा लकड़ी के कुछ टुकड़ों से खेल रहा है। वह बड़े ध्यान से, बड़ी लगन से उन टुकड़ों को आपस में जोड़ रहा था। पिता ने प्यार से पूछा, "बेटा, तुम क्या बना रहे हो?" बच्चे ने खुशी से चहककर कहा, "मैं मम्मी-पापा के लिए लकड़ी की प्लेट और कटोरी बना रहा हूँ।"
पिता को यह सुनकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मुस्कुराकर पूछा, "लेकिन बेटा, तुम इनसे क्या करोगे?" बच्चे ने बड़ी मासूमियत से कहा, "जब मैं बड़ा हो जाऊँगा और आप दोनों बूढ़े हो जाओगे. तब मैं आपको इन्हीं में खाना दूँगा।" पिता के चेहरे की मुस्कान अचानक गायब हो गई। माँ भी बच्चे की बात सुनकर एकदम चुप रह गई, और दोनों को अपनी गलती समझ आ गई।
उन्होंने महसूस किया कि उनका छोटा बच्चा वही व्यवहार सीख रहा था, जो वह उन्हें अपने बूढ़े पिता के साथ करते हुए हर दिन देख रहा था। दोनों को बहुत शर्मिंदगी हुई। वे तुरंत उठकर बूढ़े पिता के पास गए। उन्होंने उन्हें बड़े सम्मान से उठाया और वापस पूरे परिवार के साथ मेज पर बैठाया।
अब उन्हें पहले की तरह, पूरे सम्मान के साथ खाना खिलाया जाने लगा। बूढ़े पिता की आँखों में खुशी के आँसू आ गए, और उस दिन उस छोटे से बच्चे ने अपने माता-पिता को बहुत बड़ी सीख दे दी। बच्चों, बच्चे अपने आसपास के लोगों से बहुत कुछ सीखते हैं। हम जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करते हैं, वैसा ही व्यवहार वे भी सीख जाते हैं।
इसलिए अपने माता-पिता, बुजुर्गों और परिवार के हर सदस्य के साथ हमेशा प्यार, सम्मान और धैर्य से पेश आना चाहिए। यही सबसे सुंदर सीख है, जो हर घर में रहनी चाहिए...
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